Tuesday, August 6, 2024

ये मिलना भी मिलना थोड़े ही ना है

 


तेरे पास आकर तुझे छू ना सकूँ 

सामने रहकर भी साथ महफ़िल सजा ना सकूँ 

हालाते -दिल बयान की बात ही छोड़ो 

तेरे साथ रहकर भी तेरा साथ पा ना सकूँ 

ये मिलना भी मिलना थोड़े ही ना है 


तेरे हरेक सांस की आहट महसूस ना कर सकूँ 

सामने जाकर भी नजरें मिला ना सकूँ 

हालाते -दिल बयान की बात ही छोड़ो

तेरे पास होकर भी तुझे अपना ना सकूँ 

ये मिलना भी मिलना थोड़े ही ना है 


तेरे हर बात पे मुस्कुरा ना सकूँ 

सामने देखकर भी तुझे पुचकार ना सकूँ 

हालाते -दिल बयान की बात ही छोड़ो

तेरे शांत चेहरे को देखकर गुस्सा कर ना सकूँ 

ये मिलना भी मिलना थोड़े ही ना है 


तेरे नाम को मेरे नाम के साथ ला ना सकूँ 

होठों के जाम को टकरा ना सकूँ 

हालाते -दिल बयान की बात ही छोड़ो

दिल खोलकर मेरी जांन तुझे निहार ना सकूँ 

तभी तो,

ये मिलना भी मिलना थोड़े ही ना है 


रूपम 

Thursday, August 1, 2024

तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है

 


चाहे जितना भी तुझसे गुस्सा रहूं 

चाहे जितने भी दिन तुझसे दूर रहूं 

चाहे बार बार तेरे पास आने का 

हज़ारों तुझसे मिन्नतें मैं करूँ 

फिर भी,

तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है 


चाहे सब जानकर भी तुझसे खफा रहूं 

चाहे तुझे अपना मानकर भी कुछ कमी महसूस करूँ 

चाहे सामने रहते हुए भी 

लाखों बार तुझे निगाहों में भरूं 

फिर भी,

तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है 


चाहे तेरी बेफिकरी से बेजार रहूं 

चाहे फुर्सत में बेचारगी की मोहलत में रहूं 

चाहे तेरी जाहिरे - मोहब्बत के लिए 

सैकड़ों सवालात तुझसे मैं करूँ 

फिर भी,

तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है 


चाहे हर वक़्त तेरी तपिश का अरमान करूँ 

चाहे ना बात करने का शामिल मैं फरमान करूँ 

चाहे हर शाम मिलके भी जैसे 

सदियों से तेरा शिद्दत से इंतजार करूँ 

फिर भी,

तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है 


रूपम 



Wednesday, July 31, 2024

जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे

 तिल तिल मर रही तुझसे मिलने को 

तेरी बहकी निगाहों की कसम 

क़्यूँ नहीं संभालता है आके मुझे 

जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे 


हर घड़ी तड़प रही तेरे पास आने को 

तेरी उलझी सांसों की कसम 

क़्यूँ ऐसे तड़पाता है मुझे 

जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे 


हार गयी संभालके इन तेज धड़कनों को 

तेरी सौंधी खुश्बूओं की कसम 

क़्यूँ नहीं थामता है आके मुझे 

जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे 


माना बड़े पचड़े है ज़िन्दगी के सुलझाने को 

तेरी सुलझी बातों की कसम 

क़्यूँ मौके नहीं खंगालता है मिलने की मुझसे 

जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे 


जानती हूं है उल्फ़त मुझसे भी तुझको 

तेरी अनकही ख्वाबों की कसम 

क़्यूँ नहीं रोकता है यूँही जाने से मुझे 

जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे 


रूपम 




Thursday, July 18, 2024

तेरा हो जाने को जी चाहता है

 

तस्सब्बुर में तेरे खो जाने को जी चाहता है 

तू मेरे बस पास हो

तेरा हो जाने को जी चाहता है 

मुक़्क़मल हो इस इश्क़ का फितूर भी कभी 

तू मेरा है 

तुझसा हो जाने को जी चाहता है 

मुन्तज़िर ( प्रतीक्षा में ) में तेरे पागल सी हो ना जाऊं कहीं 

तू जांन है मेरी 

तुझे जान जाने को जी चाहता है 

कांमिल हो ये उल्फ़त भी कभी 

तू बस आस पास हो 

तेरी साँसों में समा जाने को जी चाहता है 

रूपम 

Wednesday, July 3, 2024

ये दिल डरता है

 ❤️मुद्दतों बाद तुझसे यूँ मिलकर 

अब बिछड़ने से ये दिल डरता है 

जान जाए ना ये ज़माना 

तेरी बाहों में आने से ये दिल डरता है 


हर एक सांस पे तेरा पहरा समझकर 

तुझसे दूर जाने से ये दिल डरता है 

मान जाए गलत ना ये ज़माना 

तेरी उल्फ़त में गुम हो जाने से ये दिल डरता है 


मोहब्बत तुझे भी है ये जानकर 

तुझको खो देने से ये दिल डरता है 

जान जाए ना ये ज़माना 

तेरी आँखों में खो जाने से ये दिल डरता है 


आदत ना हो जाये तेरी, ये सोचकर 

तुझसे नैन मिलाने से ये दिल डरता है

मान जाए गलत ना ये ज़माना

तेरी अल्फाजों में डूब जाने से ये दिल डरता है


आखिरी बाज़ी की तरह यूँही संभलकर 

तुझको हार जाने से ये दिल डरता है

जान जाए ना ये ज़माना

टूटे सपनों जैसे, तुझसे दूर जाने से ये दिल डरता है

रूपम 



Tuesday, July 2, 2024

तेरी गुस्ताखियों की आदत हमें लग गयी 🥰



 तेरी मोह्हबत की उम्र भले कम हो 

तेरी जूनूनी इश्क़ में ये आँखें भले नम हो 

तेरी वो बच्चों सी खिलखिलाहट ना कम हो 

लो मान गयी 

तेरी गुस्ताखियों की आदत हमें लग गयी 


तेरी वो तीरछी निगाहों की तारीखें भले कम हो

तेरी चाहतें छुअन का अहसास भले कम हो 

तेरी वो धीमी सी मंद मुस्कुराहट ना कम हो 

लो मान गयी 

तेरी गुस्ताखियों की आदत हमें लग गयी 


तेरी उन जादुई बातों की शामें भले कम हो 

तेरी होठों से मेरी होठों की टकराहट भले कम हो 

तेरी लफ्जों में मेरे प्यार की सुगबुगाहट ना कम हो 

लो मान गयी 

तेरी गुस्ताखियों की आदत हमें लग गयी 


तेरी तारीफ़ो के पूल की रातें भले कम हो 

तेरी ख्वाहिशों की भरपाई भले कम हो 

तेरी फरमायिशों की फेहरिश्त कभी ना कम हो 

लो मान गयी 

तेरी गुस्ताखियों की आदत हमें लग गयी 

रूपम 




Monday, July 1, 2024

मेरी हर संभलती सांस में तू 😍

 

❤️

मेरी हर संभलती सांस में तू , मुझे एक दुआ सा लगा

बहकती नदी सी थी मैं, तू किनारा सा लगा
तेरी याद तो बहुत आती है मगर
इस जिस्म के हर जर्रे पे, तू समाया सा लगा

हार जाती हूँ जब तुझपर, गुस्सा होऊं गर कभी 
तेरी मासूम सी उल्फत पे, दिल हारा सा लगा 
हर वक़्त तलाशती है तुझे ये नजर 
जान तो है यहीं , मन भरमाया सा लगा 

मोहब्बत के कई पैमाने होते होंगे शायद 
तू हर जाम से जाने क़्यूँ,अल्हदा सा लगा 
जीत जाऊं तुझे, ये मुमकिन तो नहीं 
मुकद्दर को फिर भी, तू अपना सा लगा 

तेरी बांहों मे सर रखकर गुजरे ये रात कभी 
फिलहाल तो भुला हुआ कोई सपना सा लगा
आऊं ना याद मैं,तुझको भी एक पल 
तुझे यादों में सहेजकर जीना फिर भी बाक़माल सा लगा

रूपम