Monday, July 1, 2024

मेरी हर संभलती सांस में तू 😍

 

❤️

मेरी हर संभलती सांस में तू , मुझे एक दुआ सा लगा

बहकती नदी सी थी मैं, तू किनारा सा लगा
तेरी याद तो बहुत आती है मगर
इस जिस्म के हर जर्रे पे, तू समाया सा लगा

हार जाती हूँ जब तुझपर, गुस्सा होऊं गर कभी 
तेरी मासूम सी उल्फत पे, दिल हारा सा लगा 
हर वक़्त तलाशती है तुझे ये नजर 
जान तो है यहीं , मन भरमाया सा लगा 

मोहब्बत के कई पैमाने होते होंगे शायद 
तू हर जाम से जाने क़्यूँ,अल्हदा सा लगा 
जीत जाऊं तुझे, ये मुमकिन तो नहीं 
मुकद्दर को फिर भी, तू अपना सा लगा 

तेरी बांहों मे सर रखकर गुजरे ये रात कभी 
फिलहाल तो भुला हुआ कोई सपना सा लगा
आऊं ना याद मैं,तुझको भी एक पल 
तुझे यादों में सहेजकर जीना फिर भी बाक़माल सा लगा

रूपम  

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