❤
तस्सब्बुर में तेरे खो जाने को जी चाहता है
तू मेरे बस पास हो
तेरा हो जाने को जी चाहता है
मुक़्क़मल हो इस इश्क़ का फितूर भी कभी
तू मेरा है
तुझसा हो जाने को जी चाहता है
मुन्तज़िर ( प्रतीक्षा में ) में तेरे पागल सी हो ना जाऊं कहीं
तू जांन है मेरी
तुझे जान जाने को जी चाहता है
कांमिल हो ये उल्फ़त भी कभी
तू बस आस पास हो
तेरी साँसों में समा जाने को जी चाहता है
रूपम
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