Thursday, July 18, 2024

तेरा हो जाने को जी चाहता है

 

तस्सब्बुर में तेरे खो जाने को जी चाहता है 

तू मेरे बस पास हो

तेरा हो जाने को जी चाहता है 

मुक़्क़मल हो इस इश्क़ का फितूर भी कभी 

तू मेरा है 

तुझसा हो जाने को जी चाहता है 

मुन्तज़िर ( प्रतीक्षा में ) में तेरे पागल सी हो ना जाऊं कहीं 

तू जांन है मेरी 

तुझे जान जाने को जी चाहता है 

कांमिल हो ये उल्फ़त भी कभी 

तू बस आस पास हो 

तेरी साँसों में समा जाने को जी चाहता है 

रूपम 

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