चाहे जितना भी तुझसे गुस्सा रहूं
चाहे जितने भी दिन तुझसे दूर रहूं
चाहे बार बार तेरे पास आने का
हज़ारों तुझसे मिन्नतें मैं करूँ
फिर भी,
तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है
चाहे सब जानकर भी तुझसे खफा रहूं
चाहे तुझे अपना मानकर भी कुछ कमी महसूस करूँ
चाहे सामने रहते हुए भी
लाखों बार तुझे निगाहों में भरूं
फिर भी,
तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है
चाहे तेरी बेफिकरी से बेजार रहूं
चाहे फुर्सत में बेचारगी की मोहलत में रहूं
चाहे तेरी जाहिरे - मोहब्बत के लिए
सैकड़ों सवालात तुझसे मैं करूँ
फिर भी,
तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है
चाहे हर वक़्त तेरी तपिश का अरमान करूँ
चाहे ना बात करने का शामिल मैं फरमान करूँ
चाहे हर शाम मिलके भी जैसे
सदियों से तेरा शिद्दत से इंतजार करूँ
फिर भी,
तेरी एक खिलखिलाहट मुझे हराने को काफी है
रूपम

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