तिल तिल मर रही तुझसे मिलने को
तेरी बहकी निगाहों की कसम
क़्यूँ नहीं संभालता है आके मुझे
जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे
हर घड़ी तड़प रही तेरे पास आने को
तेरी उलझी सांसों की कसम
क़्यूँ ऐसे तड़पाता है मुझे
जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे
हार गयी संभालके इन तेज धड़कनों को
तेरी सौंधी खुश्बूओं की कसम
क़्यूँ नहीं थामता है आके मुझे
जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे
माना बड़े पचड़े है ज़िन्दगी के सुलझाने को
तेरी सुलझी बातों की कसम
क़्यूँ मौके नहीं खंगालता है मिलने की मुझसे
जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे
जानती हूं है उल्फ़त मुझसे भी तुझको
तेरी अनकही ख्वाबों की कसम
क़्यूँ नहीं रोकता है यूँही जाने से मुझे
जाओ, कद्र नहीं है मेरी तुझे
रूपम

