Wednesday, July 18, 2018

वो भी क्या दिन थे..





वो भी क्या दिन थे

जब मां बाहर जाने के पहले
कहती थी कि बोलो
बाहर जाकर आती हुँ
आज घर ही कभी - कभी जाते हैं।

जब जिंदगी के सारे फलसफे
पापा से सीख जाने पर
आज स्मार्टफोन की गतिविधियां
उन्हें सिखाने से मुकर जाते हैं।

जब दोस्ती यारी के लिए
जान हाजिर होती थी
आज इगो नाम की बीमारी से
अक्सर बिछङ़ जाते हैं।

जब मोहब्बत की गलियारों में
दिल टूटते - बिखरते थे
आज वक्त की आपा- धापी में
नकली हँसी से ही सँभल जाते हैं।

रूपम

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