Tuesday, July 10, 2018

दिल ठहरता क्युँ नहीं


दिल ठहरता क्युँ नहीं



कुछ खलिश़ सा है कहीं
सितारें भी है उल्फते-चाहत
फिर भी संगीत निकलता क्युँ नहीं


जद्दोजहद है कहीं
जिंदगी भी है कमबख्त 
फिर भी महसूस होता क्युँ नहीं


जश्ने-बहार है कहीं
बेशुमार है मोहब्बत
फिर भी दीवारे-इश्क टूटता क्युँ नहीं

जलजले खुशी के है कहीं
काबिले-तारीफ है हिम्मत
फिर भी अश्क रूकता क्युँ नहीं


कुछ शिकवे है कहीं
हष्र-ए-दिल है मदमस्त 
फिर भी दिल ठहरता क्युँ नहीं


रूपम भारती

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