कुछ खलिश़ सा है कहीं
सितारें भी है उल्फते-चाहत
फिर भी संगीत निकलता क्युँ नहीं
जद्दोजहद है कहीं
जिंदगी भी है कमबख्त
फिर भी महसूस होता क्युँ नहीं
जश्ने-बहार है कहीं
बेशुमार है मोहब्बत
फिर भी दीवारे-इश्क टूटता क्युँ नहीं
जलजले खुशी के है कहीं
काबिले-तारीफ है हिम्मत
फिर भी अश्क रूकता क्युँ नहीं
कुछ शिकवे है कहीं
हष्र-ए-दिल है मदमस्त
फिर भी दिल ठहरता क्युँ नहीं
रूपम भारती

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