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खुशनूमा हर दिन हो
ये जरूरी तो नहीं
मुकम्मल जहां मिले हर किसी को
ये जरूरी तो नहीं
जुश्तज़ू आफताब की इनायत हो
ये जरूरी तो नहीं
फितूर हर इंसान की वाजिब हो
ये जरूरी तो नहीं
शिद्धत से की चाहत खुदा को मंजूर हो
ये जरूरी तो नहीं
सुकून हमेशा मयस्सर हो
ये जरूरी तो नहीं
कुरबत़ नूर-ए-उल्फत़ से हमेशा हो
ये जरूरी तो नहीं
रूपम भारती
खुशनूमा हर दिन हो
ये जरूरी तो नहीं
मुकम्मल जहां मिले हर किसी को
ये जरूरी तो नहीं
जुश्तज़ू आफताब की इनायत हो
ये जरूरी तो नहीं
फितूर हर इंसान की वाजिब हो
ये जरूरी तो नहीं
शिद्धत से की चाहत खुदा को मंजूर हो
ये जरूरी तो नहीं
सुकून हमेशा मयस्सर हो
ये जरूरी तो नहीं
कुरबत़ नूर-ए-उल्फत़ से हमेशा हो
ये जरूरी तो नहीं
रूपम भारती
